Saturday, April 7, 2018

गर्म हवाएं


तीखी चुभती  गर्म हवाएं 
दिल को कभी बहुत  झुलसाएं  
लाएं ऐसे ऐसे  बवंडर 
बिछुड़े लोग और भूले मंजर 

हर इक पल की साक्षी थीं ये 
तब तो मेरी साथी थीं ये 
लेकिन अब तो बैरी बन कर
आग लगाएं गर्म हवाएं

कर लूँ बंद सभी दरवाजे 
मैं न सुनूं इनकी आवाजें 
फिर भी कहीं से आती जाएँ 
तीखी चुभती ढीठ हवाएं

इक पल इनके पीछे भागूं 
दूजे पल फिर  वापिस हो लूँ 
पल में कहाँ कहाँ पहुंचाएं 
तेज बड़ी  हैं गर्म हवाएं 

दिल करता है बहुत सा रो लूं 
दिल के सारे ताले खोलूं 
कुछ  भी करूँ पर हल्की हो लूँ
बोझिल  हैं ये गर्म हवाएं 

तिनका तिनका कर जाएंगी 
क्या क्या छीन के ले जाएंगी 
घर से बेघर कर जाएंगी  
   बेपरवाह बेदर्द हवाएं 

आसान  नहीं होता है भुलाना 
छोड़ के सब कुछ आगे जाना 
चल ही दिए तो मुड़ना कैसा 
नादाँ हैं ये गरम हवाएं 


2 comments :

I thrive on comments.Will you oblige ?